नई साल पर नई शुरुआत 🤝

 कितना अच्छा होता है ना कि साल के पहले दिन आपको कोई अजीज मिल जाए।

भले आपकी आशा और उम्मीदें ऐसी नहीं रहीं हो फिर भी वो मौजिज मिल जाए ।।


जीवन में कई मोड़ आते है जो बिल्कुल भी अनुमानित नहीं होते है ।

भले ही दिल के कहीं किसी कौने में जगे होंगे लेकिन अनुमानित तो नहीं होते है ।


खैर रिश्ते कितने चलते है कितने निभते है ये तो भविष्य के गर्भ में होता है ।

लेकिन किसी नए से जुड़ जाना , अपना बन जाने से मन गर्व में होता है ।।


अपना बन जाने से का अर्थ कोई बाध्यताएं या सीमाओ से नहीं होता है ।

अपनी खुशियों और दुखों में सक्रिय भागीदारियों से ही होता है ।।


कुछ रिश्ते बेनाम और अनकहे तो होते है ।

मन के बहुत करीब और खुशनुमा होते है ।।


मन को कभी दिखावा और ब्रांडिंग की जरूरत ही नहीं होती है ।

मन की अपने आप में एक अलग दुनिया जहाँ सिर्फ़ एक दूसरे की इज्जत होती है ।।


कितना अच्छा होता है ना कि साल के पहले दिन आपको कोई अजीज मिल जाए।

भले आपकी आशा और उम्मीदें ऐसी नहीं रहीं हो फिर भी वो मौजिज मिल जाए ।।


ऐसा नहीं है कि रिश्ते एक दूसरे की जरूरतों से ही बनते है ।

कुछ रिश्ते सिर्फ तन और मन की खुशियों के लिए ही बनते है ।।


रिश्ता बनना और निभना दोनों अलग अलग जरूर होता है ।

लेकिन अगर एक दूसरे की कोई खास शर्तें ना हो तो फिर कोई फ़र्क़ नहीं होता है ।।


किसी से जुड़ना हमारी इच्छा हो सकती है ।

लेकिन किसी से जुड़े रहना चाहत होती है ।।


सालों से एक दूसरे के आस पास रहे लेकिन कभी पहचान नहीं हुई ।

जब जुड़ने का साझा प्रयास हुआ तो अनजान से भी पहचान हुई ।


कितना अच्छा होता है ना कि साल के पहले दिन आपको कोई अजीज मिल जाए।

भले आपकी आशा और उम्मीदें ऐसी नहीं रहीं हो फिर भी वो मौजिज मिल जाए ।।🤝


मन के विचार दिल की कलम से 

मनमौजी … (सुभाष फ़ौजी)

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