मैं कोई लेखक या कवि तो नहीं हूँ लेकिन खाली समय में दिल की भावनाओं को दिमाग की कल्पनाओं के साथ कुछ लिखने का प्रयास कर लेता हूँ। आपको कैसे लगे ये जरूर बताना, मुझे और अच्छा लिखने की ऊर्जा मिलेगी।
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कितना अच्छा होता है ना कि साल के पहले दिन आपको कोई अजीज मिल जाए। भले आपकी आशा और उम्मीदें ऐसी नहीं रहीं हो फिर भी वो मौजिज मिल जाए ।। जीवन में कई मोड़ आते है जो बिल्कुल भी अनुमानित नहीं होते है । भले ही दिल के कहीं किसी कौने में जगे होंगे लेकिन अनुमानित तो नहीं होते है । खैर रिश्ते कितने चलते है कितने निभते है ये तो भविष्य के गर्भ में होता है । लेकिन किसी नए से जुड़ जाना , अपना बन जाने से मन गर्व में होता है ।। अपना बन जाने से का अर्थ कोई बाध्यताएं या सीमाओ से नहीं होता है । अपनी खुशियों और दुखों में सक्रिय भागीदारियों से ही होता है ।। कुछ रिश्ते बेनाम और अनकहे तो होते है । मन के बहुत करीब और खुशनुमा होते है ।। मन को कभी दिखावा और ब्रांडिंग की जरूरत ही नहीं होती है । मन की अपने आप में एक अलग दुनिया जहाँ सिर्फ़ एक दूसरे की इज्जत होती है ।। कितना अच्छा होता है ना कि साल के पहले दिन आपको कोई अजीज मिल जाए। भले आपकी आशा और उम्मीदें ऐसी नहीं रहीं हो फिर भी वो मौजिज मिल जाए ।। ऐसा नहीं है कि रिश्ते एक दूसरे की जरूरतों से ही बनते है । कुछ रिश्ते सिर्फ तन और मन की खुशियों के लिए ही बनते ह...
बैठे बैठे यूं ही कुछ लिख दिया जरा टिप्पणी करना कैसा क्या है। #वक्त_का_भी_बड़ा_अजीब_किस्सा_है । जिनके पास खाली वक्त पड़ा है वें सोचते हैं काटूं कैसे। यह भी सच है कि उनके पास कोई काम नहीं है तो कटेगा भी कैसे।। लेकिन जरा उनकी भी तो सोचो जो कहते हैं वक्त मिलता नहीं कोई काम करूं कैसे।। वे अपने कामों में बिजी ही इतने रहते हैं वक्त मिले भी तो कैसे ।। वक्त का भी बड़ा अजीब किस्सा है... खैर वक्त खुद तो एक ही है लेकिन दोनों के किरदार अलग हैं।। और वे दोनों ही वक्त को लेकर परेशान हैं क्योंकि दोनों का नजरिया अलग है।। वक्त को तो शिकायत दोनों से ही नहीं है। लेकिन बिचारे वक्त की किस्मत तो देखो कि दोनों को ही शिकायत वक्त से है।। वक्त का भी बड़ा अजीब किस्सा है... और खास बात तो देखो तीनों ही अनवरत चले जा रहे हैं। ना वक्त रुक रहा है ना काम रुक रहा है और निठल्ले लोग वक्त काट भी रहें हैं।। वक्त का भी बड़ा अजीब किस्सा है। सुभाष फौजी
नए साल की पहली मुलाक़ात के इंतजार में मन थोड़ा चंचल सा है उस हंसी पल के इंतजार में ..... क्लेंडेर बदलने से कुछ नहीं होता, बस साल बदला है कुछ खास तो नहीं हुआ ना । बस बात चली है, अभी खास ए मुलाक़ात का एहसास तो नहीं हुआ ना ।।1।। जो अजीज मिल गया था, इस साल ऐसा मन को आभास जरूर हुआ है। लेकिन मौजिज से मिलना अभी भी, कहाँ खास-ए-मंजूर हुआ है।।2।। दिल का अजीज न, मिलने से होता है, न कोई मौजिज एहसास होता है। ये तो दिल की तमन्ना है, कि उससे मिलने की तलब का एहसास होता है।।3।। पहली मुलाक़ात जो है, वो इतनी आसां भी नहीं होती है। कोशिश भले दोनों और से हो फिर भी मुक्कम्मल नहीं होती है।।4।। शिकायत ये नहीं कि दोनों को अवसर न मिला। शायद उस मुलाक़ात को तकदीर का असर न मिला।।5।। नए साल की पहली मुलाक़ात के इंतजार में मन थोड़ा चंचल सा है उस हंसी पल के इंतजार में ..... पहली मुलाक़ात सिर्फ मुलाक़ात नहीं खास एहसास होती है । पसंदीदा शख्स से होने वाली मुलाक़ात की बात ही खास होती है ।।6।। ऐसा नहीं है की ...
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